भारतीय जवानों ने खरीदे दादी के सारे समोसे, इंसानियत की मिसाल बने

Wed 14-Jan-2026,12:58 AM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

भारतीय जवानों ने खरीदे दादी के सारे समोसे, इंसानियत की मिसाल बने Indian-Soldiers-Buy-All-Samosas-from-Elderly-Woman,-Gesture-Wins-Hearts
  • भारतीय जवानों ने सड़क किनारे समोसे बेच रही बुजुर्ग महिला के सारे समोसे खरीदकर संवेदनशीलता और सम्मान की मिसाल पेश की।

  • जवानों के इस मानवीय कदम से दादी की आंखें नम हुईं और आसपास मौजूद लोगों ने तालियों से उनका हौसला बढ़ाया।

  • सोशल मीडिया पर इस घटना की जमकर सराहना हो रही है, लोग जवानों को सच्चा राष्ट्रनायक बता रहे हैं।

Delhi / North Delhi :

दिल्ली/ भारतीय सेना के जवानों की बहादुरी और देशभक्ति के किस्से तो अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन इस बार उनका एक मानवीय और भावुक पक्ष सामने आया है। सड़क किनारे समोसे बेचकर गुजारा करने वाली एक बुजुर्ग महिला, जिन्हें लोग प्यार से ‘दादी’ कहकर बुलाते हैं, उनके लिए जवानों ने ऐसा कदम उठाया जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।

घटना एक सामान्य दिन की है, जब कुछ भारतीय जवान ड्यूटी के दौरान सड़क किनारे समोसे बेच रही बुजुर्ग महिला के पास रुके। ठंड और उम्र की परवाह किए बिना दादी अपने छोटे से ठेले पर समोसे बेच रही थीं। बातचीत के दौरान जवानों को पता चला कि दिन ढलने वाला है, लेकिन अभी भी कई समोसे बचे हुए हैं।

इसके बाद जवानों ने बिना किसी दिखावे के दादी के सारे समोसे खरीदने का फैसला किया। उन्होंने न केवल समोसे खरीदे, बल्कि दादी से आत्मीयता से बातचीत भी की। अचानक हुए इस व्यवहार से बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं। उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर सुकून और सम्मान की चमक साफ दिख रही थी।

आसपास मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो माहौल भावनाओं से भर गया। कई लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल में कैद किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोग जवानों की इस सोच की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। किसी ने इसे सच्ची देशसेवा बताया तो किसी ने इसे भारतीय संस्कृति का असली चेहरा कहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे मानवीय कदम समाज में भरोसा और सकारात्मकता पैदा करते हैं। भारतीय जवानों का यह व्यवहार यह दिखाता है कि वे केवल सीमा के रक्षक ही नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशील आत्मा भी हैं। यह घटना साबित करती है कि इंसानियत और सम्मान की भावना किसी वर्दी की मोहताज नहीं होती, लेकिन जब वर्दी में ऐसे संस्कार नजर आते हैं, तो पूरा देश गर्व महसूस करता है।